नजरिया

अनुच्छेद-370 हटने के बाद बदलाव की राह पर बढ़ रहा जम्मू-कश्मीर

बदलाव यह भी हुआ है कि अब जम्मू-कश्मीर के सरकारी कार्यालयों पर तिरंगा लहराने लगा है। भारतीय पर्वों को भी उल्लास के साथ खुलकर मनाया जाने लगा है।

‘वोकल फॉर लोकल’ से खुलेगी आत्मनिर्भरता की राह

प्रधानमंत्री मोदी ने दीपावली तथा उसके आगे के त्योहारों के लिए लोगों से स्थानीय उत्पादों की खरीदारी करके ‘वोकल फॉर लोकल’ को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

भगिनी निवेदिता : ‘वह भारत में भले न पैदा हुई हों, लेकिन भारत के लिए पैदा हुई थीं’

भगिनी निवेदिता ने सेवा का कार्य निस्वार्थ भाव से किया,  ना कोई इच्छा-अनिच्छा, ना कोई धर्मांतरण का छलावा, वह भारत में आकर भारतीयता के रंग में रंग ही गईं।

सौ करोड़ टीकाकरण की गौरवशाली उपलब्धि पर भी नकारात्मक राजनीति में जुटा विपक्ष

देश में कोरोना संक्रमण के मद्देनजर चल रहे टीकाकरण अभियान के अन्तर्गत 21 अक्टूबर को कुल सौ करोड़ डोज लगाए जाने का लक्ष्य हासिल किया गया।

भ्रामक इतिहास को सुधारने-संवारने की पहल

शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने इतिहास में व्याप्त भ्रामक तथ्यों एवं आधारहीन घटनाओं को हटाने और कालखंडो को सही क्रम में संवारने का मन बना लिया है।

युवाओं में राष्ट्र निर्माण की भावना जागृत कर रहा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

भारत में पिछले 96 वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश के नागरिकों में देशप्रेम की भावना का संचार करने का लगातार प्रयास कर रहा है।

मोदी राज में हो रहा भारत का सांस्कृतिक पुनरुत्थान

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश में प्रगति और परिवर्तन की एक अभूतपूर्व बयार चल पड़ी है। देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का स्वप्न भी साकार होने लगा है। 

भारतीय कूटनीति के नए शिल्पकार मोदी

सात वर्ष के ऐतिहासिक कालखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत की सफलता और साख के नए कीर्तिमान गढ़े हैं।

राजा महेंद्र प्रताप सिंह : इतिहास के एक गुमनाम नायक जिन्हें मोदी सरकार ने उचित सम्मान दिया है

राजा महेंद्र प्रताप सिंह के व्यक्तित्व के कई आयाम थे। वे स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, लेखक, शिक्षाविद, क्रांतिकारी, समाजसुधारक और दानवीर भी थे।

जयंती विशेष : पंडित दीनदयाल उपाध्याय और एकात्म मानवदर्शन

एकात्म मानव दर्शन भारत की सनातन संस्कृति एवं चिरंतन जीवन-पद्धत्ति की युगीन व्याख्या है। परस्पर सहयोग एवं आंतरिक-तात्विक जुड़ाव पर अवलंबित रहने के कारण यह विस्तारवादी-साम्राज्यवादी प्रवृत्तियों एवं महत्ववाकांक्षाओं पर विराम  लगा विश्व-बंधुत्व की भावना को सच्चे एवं वास्तविक अर्थों में साकार करता है। सरलता और सादगी की प्रतिमूर्त्ति पंडित दीनदयाल उपाध्याय बहुमुखी एवं विलक्षण