नजरिया

मोदी सरकार के विकासवादी एजेंडे को अहमियत देती दिख रही पश्‍चिम बंगाल की जनता

मोदी सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से घबड़ाकर मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी मोदी सरकार की कई जनोपयोगी योजनाओं को राज्‍य में लागू नहीं कर रही हैं।

योगी सरकार के उपलब्धियों भरे शानदार चार साल

योगी आदित्यनाथ का यह दावा सही ही लगता है कि सपा, बसपा व कांग्रेस की सरकारों की तुलना में भाजपा सरकार के चार वर्ष भारी है।

विद्या भारती के विद्यालयों की तुलना पाकिस्तानी मदरसों से कर राहुल गांधी ने कांग्रेस का वैचारिक स्तर ही दिखाया है

सत्ता के लिए समाज में विभाजन की ऐसी गहरी लकीर खींचना स्वस्थ एवं दूरदर्शिता पूर्ण राजनीति नहीं है। राहुल गांधी यह सब जिस भी रणनीति के अंतर्गत कर रहे हों, पर यह रणनीति देश की छवि को दाँव पर लगाने वाली है।

महाशिवरात्रि विशेष : शिवत्व की प्रतिष्ठा में ही विश्व मानव का कल्याण संभव है

शिव मानसिक शांति के प्रतीक हैं। वे अपनी तपस्या में रत अवस्था में उस मनुष्य का प्रतीकार्थ प्रकट करते हैं जिसे किसी और से कुछ लेना-देना नहीं रहता।

भारत की सहज-सनातन सांस्कृतिक धारा को समझे बिना संघ को समझना कठिन

संघ ने सेवा-साधना-संघर्ष-साहस-संकल्प के बल पर यह भरोसा और सम्मान अर्जित किया है। उसके बढ़ते प्रभाव से कुढ़ने-चिढ़ने की बजाय कांग्रेस-नेतृत्व एवं संघ के तमाम विरोधियों को ईमानदार आत्ममूल्यांकन करना चाहिए

गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की विराट जीत और कांग्रेस की करारी हार के मायने

गुजरात के ये चुनाव परिणाम दर्शाते हैं कि विपक्ष के तमाम कुप्रचारों के बावजूद जनता में भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार के प्रति भरोसे का भाव मजबूत हुआ है।

विरोधियों के लिए नामुमकिन है मोदी को समझना

उनका जितना विरोध होता है, जितना अपशब्दों का प्रयोग किया जाता है, उतना ही वह आगे बढ़ते जाते हैं। विपक्ष देखता रह जाता है, नरेंद्र मोदी आगे निकल जाते हैं।

पैंगोंग में चीन का पीछे हटना नए भारत की ताकत को ही दिखाता है

अब चूंकि भारतीय सेना के साहस और सरकार की दृढ़ता के परिणामस्वरूप चीन पीछे हट गया है, ऐसे में विपक्षियों के पास सिवाय खींसे निपोरने के कुछ बचा नहीं है।

छत्रपति शिवाजी : समय एवं समाज की चेतना को झंकृत करने वाले नायक

शिवाजी महाराज केवल एक व्यक्ति नहीं थे, वे एक सोच थे, संस्कार थे, संस्कृति थे,   पथ-प्रदर्शक,  क्रांतिकारी मशाल थे, युगप्रवर्तक शिल्पकार थे।

गुरूजी का संगठन मंत्र और तंत्र आज भी प्रासंगिक

गुरूजी को यह कदापि पसन्द नहीं था कि कोई भी सेवा-कार्य जनता पर उपकार की भावना से किया जाए।  उनके अनुसार ” सेवा हिन्दू जीवन – दर्शन की प्रमुख विशेषता है।