अर्थव्यवस्था

रिजर्व बैंक के समायोजन मौद्रिक रुख से अर्थव्यवस्था होगी मजबूत

बैंक क्रेडिट में वृद्धि होने लगी है और जमा में कमी आई है, जो यह दर्शाता है कि निजी खर्च और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आ रही है। आने वाले दिनों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी।

वैश्विक मुश्किलों के बावजूद आर्थिक मोर्चे पर मजबूती से बढ़ रहा भारत

कृषि, औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन की निरंतरता से भी सुधार को बल मिल रहा है और अर्थव्यवस्था में मजबूती बने रहने की संभावना लगातार बरक़रार है। 

चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बरकरार

सरकारी व्यय में वृद्धि, राजस्व संग्रह व जीएसटी संग्रह में तेजी आदि से साफ पता चलता है कि अर्थव्यवस्था मजबूती की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

बजट प्रावधानों से बैंकिंग क्षेत्र को मिलेगी मजबूती

बजट प्रावधानों से बैंकों के ऋण वृद्धि दर में इजाफा होने और एनपीए के स्तर में कमी आने की संभावना है साथ ही साथ इससे आगामी महीनों में बैंकों के मुनाफे में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के निर्यात की ओर अग्रसर भारत

वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत से वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात 100,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है, जो कि अपने आप में एक इतिहास रच देगा।

मोदी सरकार की नीतियों से चमकीली होती भारत की जीडीपी

जीडीपी, अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को मापने का पैमाना है। इसके तहत देश के भीतर एक  निश्चित अवधि के दौरान सभी वस्तु एवं सेवा का क्या मूल्य रहा था, इसका पता लगाया जाता है।

राजकोषीय दृढ़ीकरण की ओर बढ़ रहा है भारत

केंद्र सरकार द्वारा खर्चों पर नियंत्रण रखकर कर उगाही एवं अन्य स्त्रोतों से आय की उगाही पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिसका परिणाम राजकोषीय घाटे में कमी के रूप में दिखाई दे रहा है।

वित्तीय समावेशन की दिशा में मोदी सरकार के प्रयास रंग लाने लगे हैं

जिन राज्यों में प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत अधिक खाते खोले गए हैं तथा वित्तीय समावेशन की स्थिति में सुधार हुआ है, उन राज्यों में अपराध की दर में कमी आई है

जीएसटी संग्रह में लगातार वृद्धि के निहितार्थ

जीएसटी संग्रहण में सीजीएसटी का हिस्सा 23,978 करोड़ रुपए रहा, आईजीएसटी का हिस्सा 66,815 करोड़ रूपये और राज्यों का हिस्सा यानी एसजीएसटी 31,127 करोड़ रुपए रहा।

दस प्रतिशत से अधिक आर्थिक विकास दर प्राप्त करने की ओर बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था

अर्थव्यस्था के लगभग सभी क्षेत्रों (व्यक्तिगत ऋण, सेवा, उद्योग एवं कृषि क्षेत्र) में ऋण प्रदान करने की गतिविधि में महत्वपूर्ण तेजी दृष्टिगोचर हुई है।