मोदी

टीकाकरण का एक वर्ष : मोदी सरकार की मजबूत संकल्प शक्ति से ही पूरा हुआ असंभव जैसा लक्ष्‍य

देश में 16 जनवरी 2021 को टीकाकरण कार्यक्रम की शुरूआत हुई थी। पिछले एक वर्ष के दौरान टीके की करीब 156.76 करोड़ खुराकें दी गई हैं।

पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में गड़बड़ी दिखाती है कि मोदी विरोध में कांग्रेस देश विरोध पर उतर आई है

मोदी विरोध करते-करते अब कांग्रेस देश विरोध पर उतर आई है। अभी तक के इतिहास में तो ऐसा नहीं देखा गया कि किसी राज्‍य में प्रधानमंत्री की सुरक्षा 20 मिनट के लिए संकट में आ जाए।

दुनिया भर में देश का मान बढ़ाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

इस विश्वव्यापी समर्थन को देखते हुए ही मोदी ने फिजी में कहा कि भारत विश्व गुरु की भूमिका निभाएगा और अपने ज्ञान शक्ति से विश्व का नेतृत्व करेगा।

योगी सरकार के शासन में विकास के नए आयामों को छू रहा उत्तर प्रदेश

योगी सरकार उत्तर प्रदेश में बिना परिवारवाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद को महत्व दिए ‘सबका साथ सबका विकास’ के मंत्र को लेकर काम में जुटी है।

एस-400 से मजबूत होगी भारत की रक्षापंक्ति

एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खासियत यह है कि यह एक बार में 72 मिसाइल दाग सकता है और 36 परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों को एक साथ नष्ट कर सकता है।

सौ करोड़ टीकाकरण की गौरवशाली उपलब्धि पर भी नकारात्मक राजनीति में जुटा विपक्ष

देश में कोरोना संक्रमण के मद्देनजर चल रहे टीकाकरण अभियान के अन्तर्गत 21 अक्टूबर को कुल सौ करोड़ डोज लगाए जाने का लक्ष्य हासिल किया गया।

मोदी राज में हो रहा भारत का सांस्कृतिक पुनरुत्थान

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश में प्रगति और परिवर्तन की एक अभूतपूर्व बयार चल पड़ी है। देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का स्वप्न भी साकार होने लगा है। 

भारतीय कूटनीति के नए शिल्पकार मोदी

सात वर्ष के ऐतिहासिक कालखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत की सफलता और साख के नए कीर्तिमान गढ़े हैं।

कथित ‘केरल मॉडल’ पर लहालोट होने वाले केरल में बढ़ते कोरोना मामलों पर मुंह में दही जमा चुके हैं!

इसके पीछे केरल सरकार द्वारा कोरोना को हल्के में लिया जाना ही कारण है जिसने पूरे देश की चिंता बढ़ा दी है, क्‍योंकि यहां से यदि अन्‍य राज्‍यों में संक्रमण फैला तो स्थितियां कठिन हो जाएंगी।

मॉनसून सत्र : व्यर्थ हंगामा करके संसद को बाधित करने की संकीर्ण राजनीति से बाज आए विपक्ष

मॉनसून सत्र को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस दौरान शायद ही कोई दिन ऐसा बीता हो जब विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित न करनी पड़ी हो।