पाकिस्तान

एयर स्ट्राइक के सबूत मांगने की शर्मनाक राजनीति से बाज आए विपक्ष

पुलवामा हमले के बाद भारतीय सेना ने नियंत्रण पार कर आतंकी ट्रेनिंग कैम्पों पर हमला कर खलबली मचा दी। 26 फरवरी की सुबह भारतीय वायु सेना ने अपने मिराज़ 2000 लड़ाकू विमानों की मदद से नियंत्रण रेखा को पार किया। अगले 19 मिनट तक भारतीय सेना आतंकी ठिकानों पर बम बरसाती रही।

ओआईसी सम्मेलन: भारतीय विदेश नीति में जुड़ा नया अध्याय

ओआईसी द्वारा भारत को अपने सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में बुलाना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए मेजबान और अन्य सदस्य देशों ने पाकिस्तान की गुहार को भी नजरअंदाज कर दिया। वह भारत को रोकने के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन उसकी एक न सुनी गई। जबकि पाकिस्तान इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल रहा है।

सरकार की बड़ी कूटनीतिक सफलता है वीर अभिनंदन की सकुशल वापसी

पराक्रम, शौर्य और अदम्य साहस भारतीय सेना के पर्यायवाची शब्द हैं। जब हम कहते हैं कि हमारी सेना सभी तरह की स्थितियों का सामना करने को तैयार है, तो इसका उदारहण हम मिग-21 के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन के साहस से समझ सकते हैं।

आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई के बाद देश की एक ही आवाज – मोदी हैं तो मुमकिन है!

पुलवामा में भारतीय सैनिकों पर हुए कायराना हमले के बाद भारतीय वायु सेना ने जैश के ठिकानों को तबाह कर बदला लिया है। सरकार की तरफ से ये कदम अपेक्षित था।  यह स्पष्ट हो चुका है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस कार्रवाई को बाखूबी अंजाम दिया गया।

पुलवामा का प्रतिशोध: ‘ये मोदी का न्यू इंडिया है जो घर में घुसेगा भी और मारेगा भी’

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को आश्वस्त किया था कि हमारे जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी जिसके बाद भारतीय वायुसेना ने 12 दिन के बाद ही पाकिस्तान समर्थित आतंकियों पर कड़ी कार्यवाई करते हुए नियंत्रण रेखा के पार जाकर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त कर उनके नकारात्मक मंसूबों पर विराम लगा दिया।

‘पाकिस्तान की आधी हार हो चुकी है, अब उसपर सम्पूर्ण विजय का समय है’

यह सेना की बहुत बड़ी सफलता है कि उसने पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल रशीद गाज़ी को आखिरकार मार गिराया हालांकि इस ऑपरेशन में एक मेजर समेत हमारे चार जांबांज सिपाही वीरगति को प्राप्त हुए। देश इस समय बेहद कठिन दौर से गुज़र रहा है क्योंकि हमारे सैनिकों की शहादत का सिलसिला लगातार जारी है।

सब तरफ से घिरता जा रहा आतंक का सरगना पाकिस्तान

पाकिस्तान आज के समय में आतंकवाद का सबसे बड़ा पनाहगाह बन गया है। भारत से अलग होकर पाकिस्तान चाहता तो दक्षिण एशिया में अपनी एक अलग पहचान बना सकता था लेकिन भारत से मुकाबले की सनक ने उसे एक आतंकवादी देश बना दिया।

‘राहुल गांधी सेना के साथ खड़ा दिखना चाहते हैं, तो पहले सिद्धू जैसों की जबान पर लगाम लगाएं’

गत 14 फरवरी की शाम जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सेना के जवानों पर हुए आत्मघाती आतंकी हमले ने देश में शोक और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। आत्मघाती आतंकी ने साढ़े तीन सौ किलो विस्फोटक से लदी गाड़ी सीआरपीएफ के काफिले में घुसाकर विस्फोट कर दिया, जिसमें 44 जवान शहीद हो गए और कितने ही जवान ज़ख़्मी हालत में जीवन-मरण से जूझ रहे हैं।

भाषा की ताकत जाननी हो तो पाकिस्तान का यह इतिहास पढ़ लीजिये !

पाकिस्तान के लिए दो तारीखें अहम हैं। 24 मार्च, 1940 और 21 फरवरी,1952। आप कह सकते हैं कि 24 मार्च, 1940 को पाकिस्तान की स्थापना की बुनियाद रखी गई थी। और 21 मार्च, 1948 को उसी पाकिस्तान को दो भागों में बांटने की जमीन तैयार की गई। संयोग देखिए कि इन दोनों तारीखों से एक खास शख्स जुड़ा है। इसका नाम है मोहम्मद अली जिन्ना।

नागरिकता संशोधन बिल : पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्‍पसंख्‍यकों की सुध लेती मोदी सरकार

आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने अफगानिस्‍तान, पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश में धर्मिक भेदभाव और उत्‍पीड़न झेल रहे धार्मिक अल्‍पसंख्‍यकों को भारतीय नागरिकता देने के लिए उदार कानून बनाने की पहल की है। नागरिकता कानून 1955 में संशोधन करते हुए मोदी सरकार ने अफगानिस्‍तान, पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई धर्म के मानने वालों को