अरविन्द जयतिलक

समरकंद से निकला सार्थक संदेश

भारत की नजर से देखें तो समरकंद में हुए एससीओ सम्मेलन में भारत की भूमिका बेहद प्रभावी रही और प्रधानमंत्री मोदी ने अपने व्यवसायिक हितों को शीर्ष पर रखा।

देश की साख से खेलते राहुल गांधी

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कमाल के नेता हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की आलोचना के फेर में किस तरह देश की साख से खेल बैठते हैं।

नए क्षितिज पर भारत-फ्रांस संबंध

बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुलाकात ने दोनों देशों के दशकों पुराने रिश्ते को ऊर्जा से भर दिया है।

यूपी चुनाव में भाजपा की जीत का आधार है विकास और सुशासन

भाजपा ने उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में शानदार वापसी की है जो रेखांकित करता है अगर सरकारें विकास और सुशासन के लिए काम करें तो जीत तय है।

केन-बेतवा परियोजना से संवरेगा बुंदेलखड

इस परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश में दो बैराज भी बनने हैं जिससे 103 मेगावाट जल उर्जा और 27 मेगावाट सौर उर्जा का उत्पादन किया जा सकेगा।

एस-400 से मजबूत होगी भारत की रक्षापंक्ति

एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खासियत यह है कि यह एक बार में 72 मिसाइल दाग सकता है और 36 परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों को एक साथ नष्ट कर सकता है।

भ्रामक इतिहास को सुधारने-संवारने की पहल

शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने इतिहास में व्याप्त भ्रामक तथ्यों एवं आधारहीन घटनाओं को हटाने और कालखंडो को सही क्रम में संवारने का मन बना लिया है।

भारतीय कूटनीति के नए शिल्पकार मोदी

सात वर्ष के ऐतिहासिक कालखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत की सफलता और साख के नए कीर्तिमान गढ़े हैं।

इतिहास के पाठ्यक्रम में शामिल हो आपातकाल

एक जिम्मेदार राष्ट्र का कर्तव्य है कि वह अपनी आने वाली हर पीढ़ी को देश के इतिहास, संस्कृति, धर्म-दर्शन और जनतांत्रिक मूल्यों से अवगत कराए तथा साथ ही उन अलोकतांत्रिक तानाशाही विचारों को भी उद्घाटित करे जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा के विरुद्ध रहा है। यह तभी संभव होगा जब इतिहास के प्रत्येक प्रसंगों को शिक्षा के पाठ्यक्रम से जोड़ा

राहुल गांधी की राजनीतिक अपरिपक्वता पर एक बड़ी मुहर साबित हुआ अविश्वास प्रस्ताव

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जिस तरह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री के समक्ष पहुंचकर उन्हें कुर्सी से उठाने की कोशिश के साथ गले पड़कर प्रायोजित प्रहसन को अंजाम दिया, उससे न सिर्फ संसदीय गरिमा का क्षरण हुआ है, बल्कि राहुल गांधी की राजनीतिक अपरिपक्वता पर भी मुहर लगी है। हद तो तब हो गयी