डॉ दिलीप अग्निहोत्री

‘सब्जी-दूध की बर्बादी करने वाले ये लोग और कुछ भी हों, मगर किसान नहीं हो सकते’

किसानों की समस्याओं से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसा भी नहीं कि ये सभी समस्याएं पिछले तीन चार वर्ष में पैदा हुई हैं और इसके पहले किसान बहुत खुशहाल थे। आज कांग्रेस पार्टी स्वामीनाथन आयोग के लिए बेचैन है, जबकि इसकी रिपोर्ट कांग्रेस के शासन काल में आई थी। रिपोर्ट आने के बाद सात वर्ष तक यूपीए की सरकार थी, तब उसने रिपोर्ट की सिफारिशों पर कोई भी

मोदी की तीन देशों की यात्रा में चीन के लिए है सन्देश कि भारत की मोर्चाबंदी भी कमजोर नहीं है !

भारतीय विदेश नीति के लुक ईस्ट अध्याय को एक्ट ईस्ट में बदलने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को है। पिछले गणतंत्र दिवस पर आसियान देशों को आमंत्रित करना एक्ट ईस्ट का बेजोड़ प्रयास था। राजपथ पर इन देशों के शासकों की एक साथ मौजूदगी अपने में विलक्षण और महत्वपूर्ण थी। इसके पहले मोदी म्यामार और वियतनाम भी गए थे। इस बार एक्ट ईस्ट नीति को मजबूत

‘कांग्रेस बैलगाड़ी की रफ़्तार से योजनाएं लागू करती थी, मोदी बुलेट जैसी तेजी दिखाते हैं’

कांग्रेस यह कहती रहती है कि मोदी सरकार ने उसकी अनेक योजनाएं को ही आगे बढ़ाया है, लेकिन यह कहने में कोई समझदारी नहीं है। क्योकि जब कांग्रेस अपनी योजनाओं की दुहाई देती है, तो उसकी और नरेंद्र मोदी की कार्यशैली का तुलनात्मक अध्ययन होने लगता है। तुलना करते ही स्पष्ट हो जाता है कि यदि कांग्रेस बैलगाड़ी की चाल से योजनाएं लागू करके काम शुरू करती थी, तो नरेंद्र मोदी बुलेट जैसी तेजी दिखाते हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने लाखों करोड़ रुपये की योजनाएं अधूरी या लंबित छोड़ दी थीं। इसकी लागत

कर्नाटक : गठबंधन हुआ नहीं कि घमासान भी शुरू हो गया !

कर्नाटक सरकार का सत्ता के अंगना में प्रवेश क्लेश के साथ हुआ। गठबन्धन की मेंहदी लगने के साथ ही कांग्रेस ने अपना रंग दिखा दिया। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने कहा कि अभी पांच वर्ष सरकार चलाने की गारंटी नहीं दी गई है। इसके पहले मुख्यमंत्री कुमारस्वामी  ने विश्वास व्यक्त किया था कि सरकार कार्यकाल पूरा करेगी। उपमुख्यमंत्री का बयान इसी की प्रतिक्रिया में आया

‘भारत में संविधान-लोकतंत्र सब सुरक्षित हैं, असुरक्षा केवल गलत कार्य करने वालों के लिए है’

विपक्षी एकता के बीच आर्क विशप अनिल के बयान को संयोग मात्र ही कहा जा सकता है। लेकिन, सन्दर्भ और मकसद की समानता शक पैदा करती है। उन्होंने जाने-अनजाने विवाद का मौका दिया है। कहा जा रहा है कि भाजपा को अब विपक्ष के साथ चर्च के विरोध का भी सामना करना पड़ेगा। इस कयास को ममता बनर्जी और कई अन्य नेताओं के बयान से बल मिला। उन्होंने

आखिर किस मुँह से मोदी की भाषा पर सवाल उठा रहे हैं, मनमोहन सिंह !

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कभी अपने मौन के लिए प्रसिद्ध हुआ करते थे। अब अक्सर वर्तमान प्रधानमंत्री पर हमला बोलने के लिए मुखर दिखाई देते हैं। इस बार वह अपने मौन या बोलने के लिए चर्चा में नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रपति को लिखा गया उनका पत्र चर्चा में है। इसमें नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस पर हमला बोलने के प्रति नाराजगी जाहिर की गई है। मनमोहन सिंह ने मोदी की भाषा पर ऐतराज़ जताया है। वहीं कांग्रेस के दिग्गजों

राजनीतिक ही नहीं, सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रही मोदी की नेपाल यात्रा !

विदेश नीति के क्षेत्र में मित्र देशों का विशेष महत्व होता है। लेकिन, कुछ देश इस श्रेणी से भी ऊपर होते हैं। इन्हें बन्धु देश कहते हैं। इनके बीच साझा सांस्कृतिक विरासत होती है, जिसे कभी अलग नहीं किया जा सकता। भारत और नेपाल के संबन्ध इसी श्रेणी में आते हैं। यह सही है कि इसमें अनेक उतार-चढ़ाव भी हुए हैं। चीन समर्थित माओवाद ने भी इन संबंधों में कड़वाहट घोलने का प्रयास किया। इसके वावजूद रिश्तों की मूल

न्यायपालिका पर आरोप लगाकर लगातार अपनी फजीहत करवा रही कांग्रेस !

प्रधान न्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव संबन्धी कांग्रेस की याचिका याची पक्ष द्वारा वापस लेने के अनुरोध के बाद खारिज हुई। इसके सूत्रधार कपिल सिब्बल अब क्या करेंगे, यह देखने के लिए इंतजार करना होगा। लेकिन, इस प्रकरण के प्रत्येक कदम पर कांग्रेस की फजीहत हुई है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश पर कदाचार का कोई आरोप नहीं था। इन आरोपों के अलावा किसी स्थिति में संविधान किसी न्यायाधीश को

कर्नाटक चुनाव : विकास के मुद्दे पर विफल कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति !

यह अजीब है कि कांग्रेस को प्रत्येक चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की याद सताने लगती है। शायद उसे लगता होगा कि संघ पर हमला बोलकर वह अपना समीकरण दुरुस्त कर लेगी। लेकिन, वह मतदाताओं के मिजाज को समझने में विफल हो रही है। लोग जानते हैं कि सच्चाई क्या है। झूठ का सहारा लेकर लोगों को भ्रमित नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक बार भी सरकारी नौकरियों में आरक्षण

कर्नाटक चुनाव : नामदार पर भारी पड़ रहा कामदार !

कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कामदार शब्द कारगर साबित हुआ। धर्म विभाजन के सहारे चुनाव में उतरी कांग्रेस को इससे कांटा लगा है। क्योंकि, कामदार शब्द ने विकास को प्रमुख मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस अपने को इसमें घिरा महसूस कर रही है। उसकी सरकार के लिए विकास के मुद्दे पर टिके रहना संभव होता, तो चलते-चलते विभाजन का मुद्दा न उठाती। यह उसकी कमजोरी का प्रमाण है। मोदी ने इसे