अखिलेश यादव

योगी सरकार की उपलब्धियों से बौखलाहट में विपक्ष

योगी ने कोरोना में भी उत्‍तर प्रदेश को एक आदर्श राज्‍य के रूप में स्‍थापित किया एवं कुशल आपदा प्रबंधन के चलते अन्‍य राज्‍यों के लिए भी मिसाल कायम की। इससे विपक्ष बौखलाया हुआ है।

कोरोना वैक्सीन पर राजनीति विपक्ष की मुद्दाहीनता को ही दिखाती है

कोरोना आपदा से लेकर उसकी वैक्सीन तक विपक्ष की राजनीति दर्शाती है कि इस देश में विपक्ष किस कदर मुद्दाहीन हो गया है। 

कोरोना वैक्सीन पर अखिलेश यादव का बयान दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही, आपत्तिजनक भी है

कोरोना महामारी से लेकर उसकी वैक्सीन तक भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों ने विरोध के लिए विरोध की जो राजनीति की है, वो शर्मनाक और निंदनीय है।

कोरोना से लड़ाई में लॉकडाउन का महत्व विपक्ष भले न समझे, मगर आम लोगों ने बखूबी समझ लिया है

इस वीडियो का यह सन्देश विपक्ष को भी समझ लेना चाहिए कि कोरोना से लड़ाई में आम लोग सरकार और उसके लॉकडाउन आदि निर्णयों के साथ है, विपक्षी दल चाहें जो कहते रहें।

क्या लोकसभा चुनाव के साथ ही बुआ-बबुआ का लगाव भी खत्म हो गया?

उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसा हो रहा है जिसे आप हास्यास्पद कह सकते हैं। यहाँ जितनी तेजी के साथ गठबंधन बना उससे कहीं तेजी से उसका पटाक्षेप भी होता दिख रहा है। आम चुनाव से ठीक पहले मोदी-शाह की जोड़ी को रोकने के लिए मायावती और अखिलेश ने चुनावी गठबंधन किया, जिसका आशय था दलित और यादव वोट बैंक को एकदूसरे के खाते में

मोदी की सुनामी में ध्वस्त हुए जातिवादी समीकरण

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा का गठबन्धन भी समीकरण के हिसाब से हुआ था। ये सारे समीकरण जातिवादी मतों के फार्मूले से बनाये गए थे। लेकिन ये जातिवादी दल समझ ही नहीं सके कि गरीबों के लिए चलाई गई मोदी सरकार की योजनाओं से करोड़ो लोग सीधे लाभान्वित हो रहे हैं, जिनमें सभी जाति वर्ग के लोग शामिल हैं। ऐसे लोगों ने जातिवादी

जो दल ‘बलात्कार’ को ‘गलती’ मानता रहा हो, वो आजम के बयान को गलत मान ही कैसे सकता है!

जो दल ‘बलात्कार’ को ‘गलती’ मानता रहा हो, उसके लिए आजम का बयान आपत्तिजनक कैसे हो सकता है? आजम का बयान हो, चाहें अखिलेश-डिम्पल का उसके बचाव में उतरना हो, ये सब समाजवादी पार्टी के उसी बुनियादी संस्कार से प्रेरित आचरण है, जिसकी झलक सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के ‘लड़कों से गलती हो जाती है’ वाले बयान में दिखाई देती है।

ये कैसे ‘भारतीय नेता’ हैं जिन्हें अपने देश की सेना और सरकार पर ही भरोसा नहीं

आतंकी हमले और आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक पर नकारात्मक सियासत भारत में ही संभव है। यहां अनेक नेता लगातार पाकिस्तान और आतंकी संगठनों के प्रति हमदर्दी के बयान दे रहे हैं। ऊपर से तुर्रा यह कि सरकार इस मामले का चुनावी फायदा उठाना चाहती है। लेकिन इस विषय को चुनाव तक चलाने का कार्य तो विपक्ष के नेता ही कर रहे हैं। कुछ अंतराल पर इनके बयान आने का सिलसिला बन गया है। 

क्या 97 हजार करोड़ की बंदरबांट ही अखिलेश यादव का समाजवाद है?

उत्‍तर प्रदेश से एक बड़े घोटाले की आहट सुनाई दे रही है। बताया जाता है कि ये घोटाला 97 हजार करोड़ रुपए का है जो कि अपने आप में बहुत बड़ी राशि है। देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी सीएजी (कैग) की रिपोर्ट में यह गड़बड़ी उजागर हुई है। अधिक चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस राशि के खर्च का कोई हिसाब अभी तक प्रस्‍तुत नहीं किया गया है। यानी 97 हजार

अखिलेश जिस तरह एक्सप्रेसवे का श्रेय लेते थे, उसी तरह इस हादसे की जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे?

21 नवम्बर, 2016 की तारीख थी, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। इस एक्सप्रेसवे को उनका ड्रीम प्रोजेक्ट बताया गया था। इसपर लड़ाकू विमान उड़ाए गए थे। इसके बाद यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान यह एक्सप्रेसवे अखिलेश यादव के ‘काम बोलता है’ नारे की पृष्ठभूमि में चमचमाता रहा था।