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‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ है कांग्रेसी सेकुलरिज्म का असल चेहरा

जुमे की नमाज के लिए मुस्लिम कर्मचारियों को 90 मिनट का अवकाश देकर उत्तराखंड सरकार ने सिद्ध कर दिया है कि कांग्रेस ने सेकुलरिज्म का लबादा भर ओढ़ रखा है, असल में उससे बड़ा सांप्रदायिक दल कोई और नहीं है। कांग्रेस के साथ-साथ उन तमाम बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों के सेकुलरिज्म की पोलपट्टी भी खुल गई है, जो भारतीय जनता पार्टी या किसी हिंदूवादी संगठन के किसी

चंडीगढ़ निकाय चुनाव : भाजपा की चली आंधी, जनता ने दिखाया विपक्षी दलों को आईना

हाल ही में पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में निकाय चुनावों के परिणाम आये। इन चुनावों में जनता ने भाजपा को ऐतिहासिक रूप से विजयी बनाया है। चंडीगढ़ निकाय के कुल 26 वार्डों में से 22 वार्डों में भाजपा ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 20 में उसे जोरदार जीत हासिल हुई है। भाजपा की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल को सिर्फ एक सीट हाथ लगी, वहीँ पिछली बार के चुनावों में ११ सीटें जीतने वाली कांग्रेस

नये सेनाध्यक्ष की नियुक्ति का बेजा विरोध कर रहे विपक्षी दल

पिछले दिनों से एक खतरनाक राजनीतिक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। यह प्रवृत्ति है भारतीय सेना को सियासत में खींचने की। अपनी सियासी चाल के लिए सेना के इस्तेमाल की। आज़ादी के बाद से हमारे देश में सेना सियासत से ऊपर रही है। जिस तरह से विदेश नीति को लेकर कमोबेश सभी दल एक धरातल पर रहते हैं, उसी तरह से सेना को लेकर भी सभी दलों में लगभग मतैक्य रहता आया है। लेकिन अब

यूपी चुनाव : भाजपा की परिवर्तन यात्रा के आगे हवा हो रहे विपक्षी दलों के सियासी समीकरण

उत्तर प्रदेश में चुनाव को अभी लगभग दो-तीन महीने का वक्त शेष है, लेकिन सूबे की सियासत में सियासी गर्माहट का माहौल देखने को लगातार मिल रहा है। सूबे में वोटबैंक की राजनीति साधने के लिए तमाम पार्टियॉं अपने सभी पैंतरें अपना रही है। बसपा एक ओर जहां दलित समुदाय को अपनी पैतृक संपत्ति मानते हुए ब्राहाण और राजपूतों को अपने पाले में खींचकर चुनावी वैतरणी को पार करने की फिराक में दिख

दिल्ली भाजपा को और मजबूती देंगे मनोज तिवारी

बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने अपने दिल्ली संगठन में एक बड़ा बदलाव करते हुए भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता, मशहूर गायक और उत्तरी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी को पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। मनोज को मौजूदा पार्टी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय की जगह यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। मनोज तिवारी सिर्फ पूर्वांचल के लोगों में ही लोकप्रिय नहीं हैं, चूंकि वे फिल्मी दुनिया से जुड़े हुए हैं, इसीलिए हर क्षेत्र के

नोटबंदी पर जनसमर्थन की सूचक है निकाय चुनावों में भाजपा की जीत

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 8 नवम्बर को पांच सौ और हजार के नोटों पर प्रतिबन्ध का ऐलान करने के बाद से इस निर्णय को लेकर राजनीतिक गलियारों में हो-हल्ला मचा हुआ है। विपक्ष द्वारा लगातार सरकार के इस निर्णय को जनता को परेशान करने वाला बताया जा रहा है। नोटबंदी पर जनता का मिजाज़ मांपने के लिए तमाम मीडिया संस्थानों द्वारा सर्वेक्षण भी किए गए, जिनमें इसके प्रति लोगों का समर्थन ही सामने आया।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर रहा विपक्ष

देश में जबसे मोदी सरकार सत्ता में आई है, तबसे वो आतंक के खिलाफ कठोर नीति के साथ काम कर रही है। लेकिन, यह भी एक सच्चाई है कि इस दौरान विपक्ष की तरफ से सरकार को कभी भी आतंकियों के विरुद्ध किसी कार्रवाई में समर्थन नहीं मिला। बल्कि, सेना के जवानों व पुलिसकर्मियों द्वारा जब भी कोई आतंकी मारा जा रहा है, तो इसपर देश का आम जनमानस जहां कार्रवाई का समर्थन कर जवानों का हौसला

यूपी चुनाव : भाजपा के अलावा सभी दल राजनीतिक अस्थिरता का शिकार

उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक पार्टियॉ अपने-अपने तरीके से जोड़-तोड़ की राजनीति में लग गई है। प्रशात किशोर की रणनीति भी कांग्रेस के लिए सफल नही हो पा रही है। जिस सियासत को साधने के लिए कांग्रेस ने यूपी की बहू को दिल्ली से लेकर आई, उसी की वजह से रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन पकड़ चुकी है। जिस 27 साल के सूखे को खत्म करने के लिए प्रशांत किशोर ने

राजनीति नहीं, राम-भक्ति से प्रेरित है रामायण संग्रहालय के निर्माण का फैसला!

भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में ‘रामायण संग्रहालय’ के निर्माण का साहसिक और सराहनीय निर्णय केन्द्र सरकार ने लिया है। वहीं, राज्य सरकार ने भी सरयू नदी के किनारे रामलीला थीम पार्क बनाने का निर्णय लिया है। राम भक्तों पर गोली चलाने वाले और खुद को मौलाना मुलायम कहाने में गर्व की अनुभूति करने वाले मुलायम सिंह यादव के बेटे और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने थीम पार्क को

परिवारवादी पार्टियों का हश्र देखिये और समझिये कि भाजपा क्यों है पार्टी विद अ डिफरेंस!

उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में अभी जो घमासान मचा हुआ है, उसको लेकर लोग भ्रम में हैं कि इसे राजनीतिक घमासान कहें या पारिवारिक। अब चूंकि, ये सब एक राजनीतिक दल में हो रहा है तो इसे राजनीतिक घमासान कह सकते हैं, लेकिन जब उस दल की हालत पर गौर करते हैं तो स्पष्ट हो जाता है कि ये तो पारिवारिक घमासान है। बाप-बेटा, चाचा-भतीजा, भाई-भाई यही सब तो हो रहा है अभी इस